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आर के एस के कार्यक्रम की पृष्ठभूमि

10 से 19 वर्ष के बालक - बालिकाओं को किशोर आयु वर्ग में समाहित किया जाता है। इस आयुवर्ग की जनसंख्या निकट भविष्य में देश एवं प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार भी है। प्रदेश मे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर तथा सकल प्रजनन दर में कमी लाने हेतु किशोर-किशारियों के स्वास्थ्य पर ध्यान केन्द्रित करना अति आवश्यक है। मध्यप्रदेश में 10 से 19 आयुवर्ग की कुल जनसंख्या जनगणना 2011 के अनुसार 11611290 है जो कि प्रदेष की जनसंख्या का 22 प्रतिशत है। जिसमें किशोर की जनसंख्या 8419401 एवं किशोरी की जनसंख्या 7591889 है। निम्न सारणी से यह स्पष्ट हो रहा है कि ग्रामीण अंचल में 74 प्रतिशत किशोर निवासरत है तथा शेष 26 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में निवासरत है।

विवरण प्रतिशत
म.प्र. में किशोरों की कुल जनसंख्या प्रदेश की जनसंख्या का 22 प्रतिशत
कुल किशोर 53 प्रतिशत
कुल किशोरी 47 प्रतिशत
ग्रामीण किशोरों की जनसंख्या 74 प्रतिशत
शहरी किशोरों की जनसंख्या 26 प्रतिशत
10 से 14 वर्ष के कुल किशोर 53 प्रतिशत
15 से 19 वर्ष के कुल किशोर 47 प्रतिशत

यह उल्लेखनीय बात है कि 10 से 14 आयु वर्ग में 8564501 किशोर एवं किशोरी है तथा 15 से 19 आयु वर्ग में 7446789 किशोर एवं किशोरीयां है। दोनो आयु वर्ग के साथ स्वास्थ्य के भिन्न भिन्न मुद्दे जुडे हुए है जैसे रक्तालप्ता दोनो आयु वर्ग में पाई जाती है तथा कम उम्र में गर्भधारण होना, माहवारी इत्यादि समस्या अधिकत्तर 15 से 19 आयु वर्ग की किशोरीयों में देखी जाती है। वर्तमान में प्रदेष में तनाव एवं अन्य मानसिक समस्याओं की वजह से आत्महत्या के प्रयासों में वृद्वि हो रही है। प्रदेष में उच्च षिक्षा लेने हेतु घर परिवार से दूर रहकर महानगरो में निवास करने वाले किशोरो में पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं की वजह से अवसाद का प्रतिशत बढ़ रहा है। सोषल मीडिया जैसे फेसबुक, टिवट्र का प्रभाव ग्रामीण अंचलो तक देखा जा सकता है सोषल मीडिया के अति उपयोग करने से किशोरों में अकेलापन तथा परिवार से जुड़ाव कम होते जा रहा है जिसकी वजह से भिन्न- भिन्न मानसिक समस्याओं में भी वृद्वि हो रही है। शहरी किशोरो में खान पान से सम्बन्धित समस्याए जैसे मोटापा, मधुमेह टाइप 2, रक्तचाप तथा स्ट्रोक इत्यादि असंचारी रोगों का प्रतिशत भी बढ़ते जा रहा है किशोरो में तम्बाकु, सिगरेट, शराब, ड्रग्स इत्यादि के सेवन से बीमारियां जैसे कैंसर तथा सड़क दुर्घटना में मृत्यु में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम में उपरोक्त दर्षित समस्त बिन्दुओं को समाहित कर देश एवं प्रदेष में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरूवात वर्ष 2014 मंें की गई।

वर्तमान में किशोर स्वास्थ्य से संबंधित निम्न गतिविधियॉं संचालित की जा रही हैः-
1. क्लीनिक आधारित सेवाएं -

प्रदेश के 11 जिलो - अलिराजपुर, बड़वानी, झाबुआ, पन्ना, छतरपुर, उमरिया, शहडोल, सिंगरौली, सतना, मण्डला एवं डिण्डोरी के 11 जिला चिकित्सालय में एवं इन जिलों के कुल 77 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर किषोर मित्र स्वास्थ्य क्लीनिक संचालित किये जा रहे है उक्त क्लीनिकों में सेवाए लेने हेतु आने वाले किषोरों को सुविधा जनक खुषनुमा महौल में परामर्ष प्रदान किया जाता है अधिकत्तर क्लीनिक में हल्के हरे रंग का प्रयोग किया गया है ताकि क्लीनिक की दृष्यता बढे। इन क्लीनिक में परामर्ष सेवाएं अनुबंधित संस्थाओं के माध्यम से प्रदान की जा रही है जिसके अन्तर्गत उनके 88 परामर्षदाता को प्रषिक्षण प्रदान किया गया है जो कि 11 आरकेएसके जिलों के जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर कार्यरत है। परामर्षदाता परामर्ष के साथ - साथ आउटरिच गतिविधियों के माध्यम से भी किषोरो में स्वास्थ्य से सम्बन्धित विषयों में जागरूकता लाने के प्रयास हो रहे है। आगंनवाडी उच्च माध्यमिक शाला, छात्रावास आदि में एक माह में 8 दिवस आउटरिच गतिविधि की जाती है। किषोर मित्र स्वास्थ्य क्नीनिक

2. समुदाय आधारित सेवाएं -

आरकेएसके संचालित 11 जिलों के समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अन्तर्गत आने वाले चयनीत 2 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के समस्त गांवों में पीयर एजुकेटर/ साथीयां कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। प्रत्येक आषा के क्षेत्र से 15 से 19 आयुवर्ग के एक किषोर एवं एक किषोरी का चयन आषा के सहयोग साथीया के रूप में किया गया है। चयनीत साथीया को 6 रविवार को आरकेएसके के संचालन हेतु अनुबंधीत संस्थाओं द्वारा पीयर एजुकेटर/ साथीयां माड्युल में प्रषिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रषिक्षण पूर्ण होने के पश्चात साथीया द्वारा अपने ग्राम के किषोरो के बीच स्वास्थ्य के सम्बध में चर्चा कर जागरूकता लाई जानी है एवं किसी किषोर/किषोरी की स्वास्थ्य संबंधी आवष्यकता होने पर एएनएम के पास अथवा परामर्ष/क्लीनिकल सर्विस लेने हेतु किषोर मित्र स्वास्थ्य क्लीनिक जाने हेतु प्रेरित किया जाना है। साथिया कार्यक्रम में आषा, आषा सहयोगी एवं एएनएम की प्रमुख भूमिका रहेगी आषा को उसके क्षेत्र के योग्य किषोरो को साथियां बनाए जाने हेतु नामंकित करने की जिम्मेदारी दी गई है ग्राम के किषोरो के मध्य कार्य करने हेतु सतत् प्रेरणा देने का कार्य भी आषा के द्वारा संपादित किया जाना है। सब हेल्थ सेन्टर पर प्रषिक्षित एएनएम द्वारा हर माह साथियों की बैठक किया जाना है

किशोर स्वास्थ्य दिवस -

किशोर स्वास्थ्य दिवस साथीया कार्यक्रम हेतु चयनीत गॉवों में आयोजित की जाने वाली गतिविधि है जिसके आयोजन का मुख्य उद्देष्य गॉव के किशोरों के मध्य उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े एवं आवष्यकता होने पर चिकित्सकीय इलाज हेतु रेफरल किया जा सके। किशोर स्वास्थ्य दिवस का आयोजन ग्राम स्तर पर शाला/ महाविद्यालय/ पंचायत भवन इत्यादि में सूचना, मनोरंजन एवं उत्सव के माध्यम से आयोजित की जाना है जिसमें विभिन्न प्रतियोगिताएं, प्रदर्षिनी, स्वास्थ्य परीक्षण इत्यादि को सम्मल्लित किया जाना है। किशोर स्वास्थ्य दिवस में ग्राम के चयनीत साथीया, ग्राम के समस्त किशोर - किशोरी, आषा, ग्राम के मुखीया, स्कूल में पदस्थ षिक्षक, ग्राम पंचायत में कार्यरत कर्मचारी, एएनएम एवं उक्त ग्राम के निवासी सम्मल्लित होगें। यह कार्यक्रम किशोरों में नेतृत्व गुण को प्रदर्षित एवं वृ़ि़द्ध करने के अवसर प्रदान करता है।

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